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अमेरिका और इजरायल से ईरान कब तक लड़ पाएगा? वियतनाम का उदाहरण देकर एक्सपर्ट ने दिया जवाब

 Published : Mar 21, 2026 07:56 am IST,  Updated : Mar 21, 2026 08:31 am IST

एक्सपर्ट टॉम कूपर के अनुसार ईरान, अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वियतनाम युद्ध की तरह ईरान ने भूमिगत मिसाइल सिस्टम बनाए हैं, जिन्हें नष्ट करना मुश्किल है।

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ईरान लगातार इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें बरसा रहा है। Image Source : AP FILE

तेल अवीव/तेहरान: मध्य पूर्व में जारी लड़ाई को 3 हफ्ते पूरे हो चुके हैं और अभी भी यह पूरी ताकत के साथ जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह लड़ाई और कितनी लंबी होने वाली है। इस सवाल के जवाब में ऑस्ट्रिया के हवाई युद्ध विशेषज्ञ और इतिहासकार टॉम कूपर ने ANI से बात करते हुए कहा है कि लगातार हवाई हमलों के बावजूद ईरान के मिसाइलें दागते रहने से पता चलता है कि उसकी सेना के अंदर बहुत ज्यादा बैकअप और ताकत है। उन्होंने कहा कि ईरान की जवाबी कार्रवाई से लगता है कि यह जंग लंबे समय तक चल सकती है।

'वियतकांग की तरह लड़ रहे हैं ईरान के लड़ाके'

जब उनसे पूछा गया कि क्या यह जंग अब लंबी होने जा रही है, तो टॉम कूपर ने जवाब दिया, 'देखिए, ईरान के लड़ाके ठीक उसी तरह लड़ रहे हैं जैसे 1960 के दशक में दक्षिण वियतनाम में वियतकांग लड़ते थे।' उन्होंने समझाते हुए कहा कि जैसे वियतनाम की जंग में वियतकांग ने बहुत लंबी-लंबी सुरंगों का जाल बनाया था, उसी तरह आज ईरान ने अपने मिसाइलों और ड्रोनों के लिए अंडरग्राउंड सिस्टम बना रखे हैं।

कूपर ने आगे कहा, 'आज ईरानी लोग यही कर रहे हैं, लेकिन मिसाइलों और ड्रोनों के लिए। इसका मतलब है कि उनके पास जमीन के अंदर बहुत सारे मिसाइल बेस हैं।'

'ईरान ने अमेरिकी सेना को चौंका दिया है'

US के F-35 विमान के हिट होने की रिपोर्ट्स पर टॉम कूपर ने कहा, 'स्टेल्थ तकनीक विमान को अदृश्य नहीं बनाती। पिछले 10 से 15 सालों में, ईरान ने मल्टीस्पेक्ट्रल हवाई रक्षा प्रणालियां विकसित की हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले कुछ हफ्तों में कई स्टेल्थ विमानों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि यह पहली बार है जब इसे थर्मल कैमरे की फुटेज में रिकॉर्ड किया गया है, जिसे ईरान ने सार्वजनिक किया है। ईरानी UAVs, इजरायल के खिलाफ कम प्रभावी हैं, क्योंकि इसके चारों ओर मल्टिलेवल डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं, हालांकि ईरान ने अमेरिकी सेना को चौंका दिया है।'

'ईरान के अंडरग्राउंड सिस्टम को नष्ट करना मुश्किल'

टॉम कूपर ने आगे बताया कि ये जगहें सैटेलाइट से आसानी से ढूंढी जा सकती हैं, लेकिन उन्हें ध्वस्त करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा, 'सैटेलाइट की मदद से उन्हें ढूंढना तो आसान है, लेकिन इजरायल और अमेरिका के पास जो हथियार हैं, उनसे इनमें घुसकर इन्हें नष्ट करना लगभग नामुमकिन साबित हुआ है। भले ही सबसे ताकतवर हथियार इस्तेमाल कर लिया जाए, फिर भी सफलता पक्की नहीं। वे इनको नष्ट करने के लिए विशालकाय GBU-57 सुपर बंकर-बस्टर बम का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन फिर भी पूरी तरह पक्का नहीं है कि वे बर्बाद होंगे।'

'कई हफ्तों तक ये जंग जारी रख सकता है ईरान'

टॉम कूपर ने आगे कहा कि इन बमों का इस्तेमाल करने में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनकी संख्या भी बहुत कम है। उन्होंने ईरान की तैयारी की गहराई पर जोर देते हुए कहा, 'ईरान के पास इतना ज्यादा बैकअप और रिजर्व बना हुआ है कि वे इस तरह कई हफ्तों तक और भी जारी रख सकते हैं।' बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले शुरू किए थे। इन हमलों में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए थे।  इसके बाद ईरान जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर लगातार ड्रोन और मिसाइलें बरसा रहा है।

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